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ह्रदय में विराजित ज्वालामुखी जैसे राज

किसी किसी मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन में सामाजिक, पारिवारिक, व्यक्तिगत व कर्म क्षेत्र से सम्बंधित कुछ राज ह्रदय में दफन रहते हैं जो यदा कदा ज्वालामुखी की तरह धधकते रहते हैं लेकिन उनको शब्दों में उजागर नहीं किया जा सकता क्यों कि यदि मनुष्य की वाणी पर वो राज आए जाये तो उसके स्वयं के जीवन में भूचाल आ सकता है जिसकी चपेट में दूसरे का जीवन भी अस्त व्यस्त हो सकता है दूसरे के व्यक्तित्व को सुरक्षित रखने के लिये ज्वालामुखी पर नियंत्रण रखना आवश्यक होता है

वह मनुष्य प्रतिदिन उस ज्वालामुखी की अग्न को महसूस करते हुये जीवन यापन करता है तथा यह ज्वालामुखी मनुष्य के अंतिम संस्कार पर ही स्वाहा होता है


*** डॉ पांचाल

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