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स्वार्थ एक वृक्ष की भांति होता है

मनुष्य का स्वार्थ एक वृक्ष की भांति होता है जिसकी शाखाएं छल,कपट,धोखा,द्वेष,ईर्ष्या,जलन,लालच इत्यादि हैं जैसे जैसे मनुष्य का स्वार्थ बढ़ता रहता है चाहे वह स्वयं के लिए,अपनी संतान या अपने परिवार के लिए हो वैसे वैसे मन में कपट आदि रुपी शाखाएं दिन दिन प्रतिदिन बढती रहती हैं | मनुष्य इसी मकडजाल में फंसकर अपनी महत्ता को समाप्त कर लेता है |

*** डॉ पांचाल


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