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सूर्य व् चंद्रमा की महत्ता

मनुष्य प्रकृति की प्रत्येक वस्तु को अपने स्वार्थ के अनुसार महत्व देता है, सूर्य देवता नियम के अनुसार प्रतिदिन उदय व् अस्त होते हैं उदय होते हुए कोई अहंकार नहीं न ही अस्त होते समय, मनुष्य प्रात: सूर्य देवता की उपासना करता है लेकिन शरद व् ग्रीष्म ऋतु में मनुष्य चाहता है कि सूर्य देवता भी उसके अनुसार उदय व् अस्त हो मनुष्य कितना स्वार्थी है, बिना सूर्य के जीवन की कल्पना भी व्यर्थ है |इसी श्रेणी में चन्द्र देवता की उपासना की जाती है कभी दोज पर कभी अष्टमी पर कभी पूर्णिमा पर कभी अमास्या पर जबकि सभी वनस्पति पर चन्द्रमा की किरणों का अपना महत्व होता है | सूर्य व् चंद्रमा को ध्यान में रखते हुए मनुष्य को कर्म करने चाहिए कब महत्व प्राप्त होगा कब नहीं यह निश्चित नहीं होता हैं | *** डॉ पांचाल

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