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समय व् भाग्य की निराली चाल

समय व् भाग्य की चाल भी बहुत विचित्र होती है कोई भी अनुमान नहीं लगा सकता

जब भी मनुष्य कर्म क्षेत्र में पद प्रतिष्ठा प्राप्त करता है तो महत्वपूर्ण भी हो जाता है लेकिन पद विमुक्त होने के पश्चात महत्व हीन भी हो जाता है | समय बड़ी निराली चाल चलता है कहते है कि राजा हरिश्चंद्र द्वारा राज पाट त्यागने के पश्चात उनकी नीलामी की गयी लेकिन सम्पूर्ण राज्य में केवल एक मनुष्य ने ही उनको मूल्य दिया  जिससे उन्होंने जीवन यापन भी किया अथार्त पद पर रहने से ही मनुष्य का महत्व होता है, विकट परिस्थितियों का सामना भी किया और अंत में राज पाट भी प्राप्त किया | सत्य पथ पर चलने वाले मनुष्य के साथ भी ऐसा ही होता है कभी कभी उसको भी प्रबलता के साथ पद मुक्त किया जाता है लेकिन अंतत विजय केवल सत्य पथ पर चलने वाले मनुष्य की होती है | जीवन के अग्नि पथ पर प्रत्येक मनुष्य के साथ भी ऐसा हो सकता है जैसा राजा हरिश्चंद्र के साथ हुआ था | मनुष्य को समय व् परिस्थितियों का ध्यान रखते हुए धैर्य से जीवन यापन करना चाहिए समय बदलेगा कैसी भी विकट परिस्थिति हो, कोई भी साथ हो या न हो परमेश्वर तो अवश्य ही मनुष्य के साथ होगा |

*** डॉ पांचाल   


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