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  • Writer's picturekuldeepanchal9

शब्दों व् स्वप्नों के द्वारा आहत

कभी कभी ऐसा होता है कि किसी मनुष्य के द्वारा कटु सत्य बोलने से किसी की भावनाएं आहात होती हैं शब्दों के बाण चुभते हैं जो मन मस्तिष्क को घायल कर देते हैं इसके विपरीत स्वयं के स्वप्न भी मन मस्तिष्क को घायल कर देते हैं वो स्वप्न सदैव मन मस्तिष्क में विद्यमान रहते हैं तथा जीवन भर एक आस रहती है कि स्वप्न पूरे होंगे

*** डॉ पांचाल



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