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मन में कैद पिंजरे का पंछी

मनुष्य जीवन एक वरदान है मनुष्य जो जीवन जीता है उसके दो पहलू होते हैं एक आंतरिक व् एक बाह्य | मनुष्य एक ऐसा जीवन जीता है जिसका आभास केवल स्वयं को ही होता है एक ऐसा जीवन जो उसके दिल के पिंजरे में कैद होता है जिसका दर्द कोई नहीं जानता है कई अवसरों पर वह भीतर भीतर रोता है लेकिन बाहर से मौन रहता है दिल के पिंजरे में कैद उस पंछी के दर्द को कोई नहीं जानता विधि ने जो कथा लिखी है मनुष्य उस कहानी को किसी को  व्यक्त भी नहीं कर सकता मनुष्य आंसू में कलम डुबोकर कहानी लिखता है कहते है चुपके चुपके रोने वाले रखना छिपाकर दिल के छालें रे विधि ने तेरी कथा लिखी आंसू में कलम डुबो तेरा दर्द न जाने कोई क्यूंकि मनुष्य पत्थर के हो चुके हैं


*** डॉ पांचाल


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