top of page
Search
  • Writer's picturekuldeepanchal9

मन का बोझ

कहीं कहीं बोझ या भार का कम होना अच्छा होता है जैसे यदि तीर के पीछे भार होगा न तो उसकी गति तीव्र होगी न ही सही लक्ष्य पर होगा,पहाड़ या ऊंचाई पर चढ़ते समय भार का कम होना गंतव्य स्थान पर पहुंचने में सरल होता है,इसी प्रकार मन में जितने विचार या द्वन्द कम होंगे उतना ही जीवन सरल होगा | मन का बोझ मनुष्य के जीवन को नीरस बना देता है अत: मन में बोझ को कम करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करके जीवन आनंदमयी बनाये |

*** डॉ पांचाल



40 views0 comments

Recent Posts

See All

धनी मनुष्यों के महंगे शौक

महंगे जूते वही खरीदते हैं जो चंद कदम ही पैदल चलते हैं महंगी घड़ियाँ वही खरीदते है जिनके पास समय देखने के लिये भी समय नहीं होता महंगी गाड़ियां भी वही खरीदते हैं खरीदने वाले से अधिक सवारी ड्राइवर के भाग्य

Comments


Post: Blog2_Post
bottom of page