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प्रकृति व् स्त्री

प्रकृति व् स्त्री में कुछ -कुछ समानताएं होती है,दोनों में सहनशीलता है, दोनों मनुष्य को जीना सिखाती हैं, उन्हें समय- समय पर आगाह करती रहती हैं, मनुष्य को परिपक्व बनाती हैं लेकिन उसके पश्चात भी मनुष्य उन पर अत्याचार भी कर देता है अपने स्वार्थ के लिए मनुष्य प्रकृति से खिलवाड़ कर रहा है उसका दोहन कर रहा है, ऐसा ही कुछ स्त्रियों के साथ भी हो रहा है | प्रकृति व् स्त्री की सहनशीलता समाप्त होने से पहले दोनों प्रतिकूल होकर अपना विकराल रूप अवश्य दिखा देती हैं जैसे प्रकृति में भूचाल,आंधी तूफ़ान इत्यादि इसी प्रकार स्त्री भी | धृतराष्ट्र की सभा में द्रौपदी के चीरहरण के समय सभी योद्धाओं का पौरुष बल समाप्त हो गया था द्रौपदी ने किस प्रकार अपने अपमान का प्रतिशोध लिया विवरण करने की आवश्यकता नहीं हैं |


*** डॉ पांचाल




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