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प्रकृति की निश्चित सीमा

प्रकृति ने सृष्टि की प्रत्येक वस्तु को एक निश्चित सीमा में बांध रखा है अगर समुन्द्र को उसकी इच्छानुसार आजादी दे दी गयी होती तो वह पृथ्वी की प्रत्येक शानदार व् खूबसूरत वस्तु को मृत्यु की नीदं सुला देता | प्रकृति ने इसलिए इसे चट्टानों और रेतीले साहिलों से बांध दिया है और सृष्टि के जन्म से लेकर आज तक यह चट्टानों से टकराता आ रहा है या रेतीले साहिलों को अपने विषैले झाग से मारता आ रहा है मगर क्या चट्टानों ने लहरों को रास्ता दिया या साहिलों ने दम तोडा |

*** डॉ पांचाल


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