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पोषण व् शोषण

सृष्टि के आरम्भ से ही दोनों शब्द मनुष्य के जीवन में चरितार्थ हैं | परमेश्वर के अतिरिक्त मातापिता ही पोषण करते हैं हो सकता है कहीं अपवाद भी हो | कुछ क्षेत्रों में पोषण करने वाले होते हैं कुछ क्षेत्रों में शोषण करने वाले होते हैं लेकिन कहीं कहीं ऐसा भी देखा गया है कि पोषण और शोषण करने वाला एक ही होता है |

*** डॉ पांचाल



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