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पाप व् पुण्य

चोरी करना भी एक कला है चोर यह चाहता है कि किसी को भी भनक न लगे और वह अपने कार्य में सफल हो जाये | मनुष्य को पुण्य या दान भी ऐसे ही करना चाहिए कि दायाँ  हाथ दान करे तो बाएं हाथ को पता न चले तथा मनुष्य पाप,छल ,कपट  व् धोखा करें तो ढोल बजाकर करे  जिससे सभी को पता चले ऐसा करने से कोई भी मनुष्य पाप करने का साहस न कर सकेगा |

*** डॉ पांचाल


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