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परमेश्वर द्वारा रचित भाग्य

मनुष्य परमेश्वर द्वारा रचित एक कृति है व उसका भाग्य भी परमेश्वर के कर कमलों के द्वारा ही उसी की कलम से लिखा जाता है जो कभी भी नही पलटता जीवन यापन करने के पश्चात मनुष्य के कर्मों का हिसाब लगाया जाता है जब परमेश्वर द्वारा ही सब कुछ रचित भाग्य लिखा गया है तो किन कर्मों को पाप पुण्य की श्रेणी में रखा जाता है यह मेरे मन मस्तिष्क में गूढ़ प्रश्न है ?


*** डॉ पांचाल


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