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  • Writer's picturekuldeepanchal9

नकारात्मक व सकारात्मक ऊर्जा

ऐसा नहीं है कि मन्दिर में मनुष्य केवल अपने स्वार्थ हेतु जाता है उपासना करने के लिए जाता है

कहा जाता है कि किसी मनुष्य के समक्ष रहने से कुछ नकारात्मक व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती मनुष्य को ऐसे मनुष्य के समक्ष होना चाहिये बैठना चाहिए जहाँ से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हो जो भी मनुष्य हमारा हित चाहे


मन्दिर में सदैव किसी भी इष्टदेव के समक्ष बैठने से सकारात्मक ऊर्जा ही प्राप्त होती है

रक्तचाप भी सुचारू रूप से चलता है


*** डॉ पांचाल



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