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  • Writer's picturekuldeepanchal9

जीवन कब तक कैसी- कैसी परीक्षा लेगा

शपथ ली थी अग्नि पथ पर चलने की,

अग्नि पथ पर चलते -चलते अब पैर जलने लगे हैं,चलते -चलते शूल भी चुभने लगे हैं,चलते- चलते ये पग अब रुकने व् थकने लगे हैं,चलते- चलते मन मस्तिष्क भी रोने लगे हैं,अब सो जाने का मन करता है, हे परमेश्वर थाम लें , हौंसला दें नहीं तो अब जिन्दगी छोड़ने लगे हैं

***डॉ पांचाल





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