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जल व् अग्नि के बंधन के पश्चात

बंधनों में बंधने के पश्चात उसकी पहचान सीमित हो जाती है मनुष्य के बंधन में बंधन के पश्चात उसकी महत्वकांक्षा उसके अंदर घुट कर रह जाती है क्यूंकि उसकी ऊर्जा शक्ति क्षीण हो जाती है

जल को यदि बंधन में बाँध दिया जाता है तो वह अग्नि उत्पन्न करता है लेकिन यदि उसको उबाल दिया जाये तो अग्नि जल के अस्तित्व को समाप्त कर देती है

इसी प्रकार अग्नि को बंधन में सीमित कर दिया जाता है तो उसकी ऊर्जा शक्ति कम हो जाती है जल के द्वारा अग्नि को शांत किया जा सकता है लेकिन जंगल में फैली अग्नि व इस ब्रह्माण्ड में उत्पन्न अग्नि को शांत नहीं किया जा सकता

*** डॉ पांचाल


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