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कर्म व् भाग्य में प्रधानता

मनुष्य के जीवन में ऐसा नहीं है कि उसके कर्मों का दंड ही उसे मिले कई अवसरों पर ऐसा होता है कि किसी दूसरे मनुष्य के द्वारा किये गये कर्मों का दंड हमें मिलता है जो हमारे भाग्य में लिखा होता है उदाहरण के अनुसार आप अपनी कार की सर्विस करवाते है उससे अगले दिन ही आपकी कार अनायास ही दुर्घटना ग्रस्त हो जाती है जिससे आपको मानसिक,आर्थिक व् शारीरिक कष्ट होता है जो आपके भाग्य में लिखा होता है लेकिन कर्म आपने नहीं किसी दूसरे मनुष्य ने किये थे | इसी प्रकार आप खून पसीने द्वारा अर्जित धन से अपना घर बनवाते हैं लेकिन मिस्त्री के द्वारा गलत कर्मों से आपका मकान खराब हो जाता है क्यूंकि आपके भाग्य में ऐसा ही लिखा होता है | निष्कर्ष स्वरुप कहा जा सकता है कि कर्म व् भाग्य समानांतर कार्य करते हैं जिसको अनदेखा नही किया जा सकता हैं |


*** डॉ पांचाल



#trendsetterdrpanchal#goodluck#karma

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