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  • Writer's picturekuldeepanchal9

अब स्वीकार नहीं

किसी को खुश रखने के लिए स्वयं का दिल जलाना पड़े अब स्वीकार नहीं,अपनी आकांक्षाएं पूरी करने के लिए परमेश्वर की अनदेखी अब स्वीकार नहीं

किसी को रौशनी देने के लिए स्वयं का घर जलाना पड़े अब स्वीकार नहीं, कटु सत्य बोलकर किसी का दिल दुखाना अब स्वीकार नहीं,


*** डॉ पांचाल



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