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अनंत ही अनंत ब्रह्माण्ड,समुन्द्र,सृष्टि,पृथ्वी व् मनुष्य का मन मस्तिष्क

विज्ञान प्रगति के पथ पर अग्रसर है नित नए नए अविष्कार हो रहे हैं लेकिन अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ पर अभी भी विज्ञान सफलता प्राप्त नहीं कर सका है | जैसे ब्रह्माण्ड में स्थित अनंत आकाश गंगा, आकाश में स्थित अनंत तारे सितारे, समुन्द्र की गहराई उसमें अनंत रत्न व् जड़ी बूटियां,हिमालय में विद्यमान अनंत जड़ी बूटियां व् औषधियां, पृथ्वी में विद्यमान अनंत तत्व,वायु में अनंत गति,सृष्टि में विद्यमान अनंत जीवाणु,कीटाणु,प्रजाति इत्यदि और अंत में मनुष्य के एक अति सूक्ष्म मन मस्तिष्क में विद्यमान खुले या बंद नेत्रों में अनंत विचार,कल्पनाएँ,आकांक्षाएं,स्वप्न जिसकी कल्पना व्यर्थ व् असंभव है | इन सबको समझने में विज्ञान सदैव असमर्थ रहेगा |

*** डॉ पांचाल


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